प्राचार्य ने ज़बरदस्ती कटवा दिए बाल
गुरुवार, 18 दिसंबर, 2008
बिंदू ने प्राचार्य
के ख़िलाफ़ मामला दर्ज करवाया है
उत्तर प्रदेश के जौनपुर में पुलिस ने एक नर्सिंग कॉलेज के प्राचार्य के ख़िलाफ़ एक दलित छात्रा के बाल ज़बरदस्ती कटवाने के आरोप में मामला दर्ज किया है। पुलिस ने दलित प्रताड़ना विरोधी क़ानून के तहत भी मामला दर्ज किया है। वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ब्रृजलाल ने रिपोर्टरों को बताया कि छात्रा बिंदू के लंबे बाल थे और वह उन्हें खुला रखा करती थी। पुलिस का कहना है कि कॉलेज के अधिकारियों ने इस पर आपत्ति की और बताया कि यह कॉलेज के नियमों के ख़िलाफ़ है। पुलिस के अनुसार कॉलेज के अधिकारियों ने बताया कि बिंदू ने नियमों का पालन करने से इनकार कर दिया। अधिकारियों का कहना है कि बिंदू ने पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज करवाई है कि कॉलेज के अधिकारियों ने उनकी इच्छा के विरुद्ध उनके बाल ज़बरदस्ती काट दिए। बृजलाल का कहना है कि पुलिस प्राचार्य गिरिजा कौशिक को गिरफ़्तार करने की कोशिश कर रही है। उत्तरप्रदेश में इससे पहले भी दलितों को प्रताड़ित किए जाने की ख़बरें आती रही है।
के ख़िलाफ़ मामला दर्ज करवाया हैउत्तर प्रदेश के जौनपुर में पुलिस ने एक नर्सिंग कॉलेज के प्राचार्य के ख़िलाफ़ एक दलित छात्रा के बाल ज़बरदस्ती कटवाने के आरोप में मामला दर्ज किया है। पुलिस ने दलित प्रताड़ना विरोधी क़ानून के तहत भी मामला दर्ज किया है। वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ब्रृजलाल ने रिपोर्टरों को बताया कि छात्रा बिंदू के लंबे बाल थे और वह उन्हें खुला रखा करती थी। पुलिस का कहना है कि कॉलेज के अधिकारियों ने इस पर आपत्ति की और बताया कि यह कॉलेज के नियमों के ख़िलाफ़ है। पुलिस के अनुसार कॉलेज के अधिकारियों ने बताया कि बिंदू ने नियमों का पालन करने से इनकार कर दिया। अधिकारियों का कहना है कि बिंदू ने पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज करवाई है कि कॉलेज के अधिकारियों ने उनकी इच्छा के विरुद्ध उनके बाल ज़बरदस्ती काट दिए। बृजलाल का कहना है कि पुलिस प्राचार्य गिरिजा कौशिक को गिरफ़्तार करने की कोशिश कर रही है। उत्तरप्रदेश में इससे पहले भी दलितों को प्रताड़ित किए जाने की ख़बरें आती रही है।
चार दलितों की गोली मारकर हत्या
09 जुलाई, 2008 जयपुर
'पंद्रह दलित रोज़गार गारंटी कार्यक्रम के तहत काम करने जा रहे थे जब चाल दलितों को अलग किया गया और गोलियाँ चलाई गईं' पूर्वी राजस्थान के धोलपुर ज़िले में चार दलितों की गोली मारकर हत्या कर दी गई है। पुलिस ने इस घटना की पुष्टि की है और कई वरिष्ठ अधिकारी घटनास्थल पर पहुँच गए हैं। पुलिस के अनुसार धोलपुर ज़िला मुख्यालय से क़रीब 40 किलोमीटर दूर ढांढ़ी-की-पुरा गाँव में ये घटना सुबह तब घटी जब 15 दलित रोज़गार गारंटी कार्यक्रम के तहत काम पर जा रहे थे। घटनास्थल पूर्वी राजस्थान में मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की सीमा से सटे चंबल के इलाक़े में हुए हैं। बताया गया है कि सभी मृतक पुरुष हैं और जाटव जाति के हैं। 'हमलावर ठाकुर-गूजर जाति के'
घटनास्थल पर पहुँचे भरतपुर रेंज के पुलिस प्रमुख उमेश मिश्र ने बीबीसी को बताया, "व्यापक जाँच अभियान के तहत दोषियों की खोज की जा रही है।" व्यापक जाँच अभियान के तहत दोषियों की खोज की जा रही है. प्राप्त जानकारी के मुताबिक हमलावर ठाकुर-गूजर समुदाय के थे. हालाँकि प्रारंभिक सूचना के अनुसार ये ज़मीन के मुद्दे पर पुरानी दुश्मनी का मुद्दा लग रहा है।
उमेश मिश्र, भरतपुर रेंज आईजी
उनका कहना था, "प्राप्त जानकारी के मुताबिक हमलावर ठाकुर-गूजर समुदाय के थे. हालाँकि प्रारंभिक सूचना के अनुसार ये ज़मीन के मुद्दे पर पुरानी दुश्मनी का मुद्दा लग रहा है."
उमेश मिश्र ने बताया कि सात लोगों का एफ़आईआर में नाम लिया गया है.
इस इलाक़े में कुछ साल पहले भी एक दलित को शर्मिंदा करने की कोशिश हो चुकी है और इस नज़रिए से दलितों से संबंधित मामले काफ़ी संवादनशील माने जाते हैं.
उमेश मिश्र का कहना था कि इस घटना के बाद उस क्षेत्र में तनाव बढने की शंका को देखते हुए पुलिस ख़ासी सावधानी बरत रही है।
दलित बच्ची को झुलसाने की घटना
बच्ची को अस्पताल में भर्ती कराया गया है

उत्तर प्रदेश पुलिस का कहना है कि मथुरा के पास एक गाँव में मंगलवार को उच्च जाति के एक युवक ने छह साल की एक दलित बच्ची को जलते कूड़े में धकेल दिया.
पुलिस के मुताबिक बच्ची को अस्पताल में भर्ती करवाया गया है. बच्ची की हालत ख़तरे से बाहर है.
मथुरा से 40 किलोमीटर दूर तरौली जानुबी नाम के गाँव में जब बच्ची अपनी माँ के साथ एक उच्च जाति के घर के पास बनी सड़क से गुज़र रही थी तब यह घटना हुई.
18-19 वर्षीय सुनील ने बच्ची को अपने घर के पास से गुज़रने वाली सड़क से जाने से रोका. लड़की घबरा कर रुक गई. उसके बाद अभियुक्त ने वहाँ पर एक सुलगते हुए कूड़े के गढ्ढे में बच्ची को धक्का दे कर गिरा दिया
आरके चतुर्वेदी, मथुरा के एसएसपी
मथुरा के एसएसपी आरके चतुर्वेदी ने बीबीसी को बताया, "18-19 वर्षीय सुनील उर्फ़ सन्नी ने बच्ची को अपने घर के पास से गुज़रने वाली सड़क से जाने से रोका. लड़की घबरा कर रुक गई. उसके बाद अभियुक्त ने वहाँ पर एक सुलगते हुए कूड़े के गढ्ढे में बच्ची को धक्का दे कर गिरा दिया."
पुलिस का कहना है कि भारतीय दंड सहिता यानी आईपीसी की धारा 307 और अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति क़ानून के तहत अभियुक्त को गिरफ़्तार कर जेल भेज दिया गया है.
हालांकि पुलिस ने इस घटना के पीछे किसी तरह के जातिगत द्वेष से इनकार किया है लेकिन भारत में गाहे-बगाहे दलितों के ऊपर विभिन्न तरह के अत्याचार की घटनाएँ होती रहती है.
पुलिस का कहना है कि मामले की पूरी छानबीन की जा रही है।





